साधक साधना में उपयोग की सामग्री (नैवेद्य, भोग) तथा अपना भोजन स्वयं तैयार करें। शनि, कालसर्प, मंगलदोष, पितृदोष एक झटके में खत्म, बस शर्त ये हैं साधक, अनुष्ठान, जप के बाद भी नियमित मंत्र जप करते रहें। प्राचीन तंत्र शास्त्रों पर विश्वास कर साधना करें । हालांकि इसके लिए उसे https://louisp901xrj4.tusblogos.com/profile